Friday, 21 August 2015

आँखें

इन आँखों का कमाल ,
तो देखिये जनाब _
कैसी इनमें गहराई है ,
मैंने तुम्हें देखा ,
तुमने मुझे देखा और ,
एक दूजे को जान गये ,
मान गये ,
कैसे हैं इंसान,
हम- तुम पहचान गये .

Thursday, 20 August 2015

खूबसूरती

खूबसूरती की हम क्या कहें ,
अमल करने को इसके ,
ना कोई किताब है .
बस इतना समझ लिजै ,
किसी ने सूरत को देखा ,
किसी ने सीरत को देखा और
कहीँ नज़रों से हुई बात  .
_ _ _ _ Aparna jha .
फोटो web images से ली गयी है .

दिले- नादान

दिल नादान नहीँ ,
बस यूँ समझ लीजिये ,
अजब ही किस्सा है इसका .
ये दर्द में भी हँस लेता है
और ,
खुशी में भी रो लेता है .
बस खुद को खुदा बना कर ,
ज़माने से जुदा कर लेता है .
_ _ _ Aparna jha
Photo web images se liya gaya hai . .


Wednesday, 19 August 2015

दोस्त

ऐ दोस्त ,
इतना तो इत्मीनान रख ,
जिसे दिल में बसा लिया ,
उसे याद करना कैसा
और ,
भूल जाना कैसा .
_ _ _ _ Aparna jha .
Ye sandhya singh ke timeline se liya gaya photo hai .

लौ

फ़िर तेरी कहानी याद आयी ,
फ़िर अपना ज़माना याद आया .
जुदा तुम भी ना थे ,
जुदा हम भी ना थे .
जिंदगी के जद्दोजहद में _
जुदा तुम भी हुए ,
जुदा हम भी हुए .
ये तो एक लौ है  बाँकी ,
जिससे हम तुझ से बँधे ,
तुम हमसे बँधे .
_ _ _ _ _ _ Aparna jha .
ये फोटो संध्या सिंह के timeline से ली गयी है .

कोई लौटा दे बीते हुए कल

फ़िर बचपन एक बार
लौट के आया था , जब
मैने बच्चों की खातिर ,
नाव बनाया था .
तब भी नदी का किनारा था ,
दिल एक बार फ़िर से आवारा था .
सच में कहाँ आ गये हम ,
समझदारी के दल- दल में.
मस्ती भी है , आवारगी भी पर ,
बस अब ना वो  नजारा है .
_ _ _ _ _ Aparna jha .

ये फोटो संध्या सिंह के timeline के सौजन्य से .

Tuesday, 18 August 2015

लोग क्या कहेंगे

सदियों से सुनते आये हैं _
कि " लोग क्या कहेंगे ".
पीढियों ने मानी ,
समाजों ने जानी ,
कभी दबे मन  से ,
कभी झुके सिर से ,
तो कभी दबे कदमों से ,
रवायतों को हमने मानी ,
कि लोग क्या कहेंगे .
कलियों को खिलने से रोका ,
तो कभी फूलों को हँसने से रोका .
कभी सरस्वती को रोका ,
कभी दुर्गा को दबोचा ,
इंसानियत को मिट्टी में मिलाया,
तो कभी प्रेम को शर्मसार किया ,
बस इसलिये कि
" लोग क्या कहेंगे " .
नये खयालातों से डर कैसा? 
नये जज्बातों से डर कैसा ?
बदलती दुनिया के रुख़ से डर कैसा ?
क्यों कोई यह माने _
कि " लोग क्या कहेंगे " .
क्या वह आगे बढ़ पाया,
क्या वह तूफानों से डट पाया ,
क्या वो जी पाया , जिसने सोचा_
" लोग क्या कहेंगे " .
हवाओं को रोक सका ना कोई ,
समंदर का रुख़ मोड़ सका ना कोई ,
समय को रोक सका ना कोई .
लक्ष्य पर चलने वाले,
आगे बढा ही करेंगे .
रुक गया तो मौत हुई .
क्रांति के लिये रफ़्तार जरूरी है .
सोने वाले तो यही कहेंगे _
" लोग क्या कहेंगे "

फोटो web images se ली गयी है .