वो चंद अल्फाज ही थे जो तेरी यादों को बरकरार रखा
वो चंद . अल्फाज ही थे जिसने तेरी बातों को याद रखा
बड़ी मेहर्बानियाँ हैं इन अल्फाजों की
ये हमें मिलाती भी हैं और संग जुदाई भी है .
@ Ajha .31. 03. 16
Friday, 1 April 2016
वो चंद अल्फाज . . .
अल्फाज . . .
अल्फाज
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अल्फाजों से दोस्ती अपनी पुरानी है
ये मेरी वो अनकही कहानी है
रिश्ते भी यही निभाती है
जज्बातों को मेरी तुम तक पहुँचाती है
ना कोई शुक्राना इसे चाहिये
ना कोई नज़राना इसे चाहिये
ना ही तौहमत मुझ पे ये लगाती है
बस मेरा रिश्ता इनसे कुछ कोरे काग़ज़
और चंद लफ्जों का है
मेरे सुख और दुःख को बखूबी से उतारती
मुझ जैसा ही है ये भी जज्बाती
मेरी शक्ति है , भक्ति है ये
जब तक जागूूँ जागे है ये
नींद में भी सपना बनकर , अपना बनकर
सहलाती है , सोते भाग्य जगाती है
अब बोलो कैसे भूलूँ इनको मैं
जो सबसे जुड़ने का एक तार है
मेरे जीने का ऐलान है
खुदा से मेरी बगावत का फ़रमान है ,
इसके बिना मेरी ज़िंदगी अधूरी है
हाँ ये मेरे अल्फाज हैं और
मुझे इनसे प्यार है , प्यार है , प्यार है
इसके बिना मेरा जीना दुश्वार है
@ Ajha . 31. 03. 16
इश्क भी ज़हर होता है . . . . .
इश्क की बात भी ज़हर सी होती है , ये तब जाना जो बेमुरवत लोगों से आशना हुए .
ishq ki baate bhi zahar si hoti hai, ye tab jaanaa jo bemuravvat logon se aashnaa hue.@Ajha.31.03.16
तुम्हारी यादों ने . . .
तस्वीर पे शेर :
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तुम्हारी यादों ने क्या कमाल कर दिया
अभी तो तस्सवुर ही था तेरा
बहुत नामुकिन थी ये बातें , पर ये क्या
पूरी किताब लिख दिया .
पसे - चिलमन थीं जो बातें
उसे सरेआम कर दिया .
ना होगा गवारा इस ज़माने को
क्यों ऐसी ख्वाहिश खुलेआम कर दिया .
वैसे भी इन बातों से होता ही क्या
वक्त ने इसे नज़रंदाज़ कर दिया .
इन बातों की गहराइयों को भला समझेगा कौन
इस लिये इन बातों को गुमनाम कर दिया
ज़िंदगी जीने के बहाने हैं कई और
खुद को इन बातों से अंजान कर लिया .
क्यों हर बातों को ग़म में ही तौला करें
इस तरह खुद को खुशकिस्मत इंसान कर लिया. @ Ajha . 31. 03. 16
Aparna Jha
गुनाहगार ठहरे . . .
हवा जिस ओर चली हम भी साथ हो लिये
पता ना चला कि कब नादानियाँ हुईं
कब गुस्ताखियाँ
ना ही गलतफहमियों का अंदाजा रहा
ये तो उनकी सोच का नतीजा था
जो हम गुनाहगार ठहरे
ना कोई ख़्वाहिशें ऐसी थीं , ना कोई मंजिलें ऐसी
खुदा पाक रखे , हम तो अपने सफ़र पे काबा को निकले थे
हमें अपने मंजिले- मकसूद की तलाश थी .
@ Ajha . 01. 04. 16
कविता . . .
अंतराष्ट्रीय कविता दिवस को समर्पित मेरी कविता
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जीवन का उद्गम
जीवन का अंत
और इसके बीच एक काल चक्र
जीवन लम्बी भी
जीवन कभी छोटी सी
और तय हुआ जाता एक सफ़र
जीवन एक सपना भी
कभी तमन्ना भी
और इसी उम्मीद में तय होती जिंदगी
जीवन एक ध्येय भी
जीवन एक श्रेय भी
और इसी को पूरा करती हुइ एक उम्र
जीवन कभी टूटती भी
जीवन कभी बिखरती हुई
और इसी तोड़ - जोड़ में बीता पल
जीवन शब्दों का सागर
जीवन भावनाओं से भरा गागर
और यही है सब जमा पूँजी
मेरी कविताएँ , जो कुछ भी ना माँगे
बस इक अदद कोरा काग़ज़
जो मेरी सारी बातों को लिख जाये
@ Ajha . 21. 03. 16
Aparna Jha
सब कुछ लुटाने को . . .
सब कुछ लुटाने को जी चाहता है
- - - - - - - - - - - - शाहिर लुधियानवी .
मेरी खातिर लिखे वो चंद अशआर
वो तेरे हर बातों में मेरा होना
तन्हाइयों में भी मुझ को ही सोचना
एक मुजस्सिमा भी बनाया है मेरी जुदाई में
तुझ में " मेरी " आदत बेशुमार होना
अब इससे आगे मैं क्या कहूँ _
दिल - ओ - जान लुटाने को जी चाहता है . @Ajha . 01.04. 16
Aparna Jha
#KaafiyaMilaao
मुजस्सिमा - मूरत ,