अंतराष्ट्रीय कविता दिवस को समर्पित मेरी कविता
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जीवन का उद्गम
जीवन का अंत
और इसके बीच एक काल चक्र
जीवन लम्बी भी
जीवन कभी छोटी सी
और तय हुआ जाता एक सफ़र
जीवन एक सपना भी
कभी तमन्ना भी
और इसी उम्मीद में तय होती जिंदगी
जीवन एक ध्येय भी
जीवन एक श्रेय भी
और इसी को पूरा करती हुइ एक उम्र
जीवन कभी टूटती भी
जीवन कभी बिखरती हुई
और इसी तोड़ - जोड़ में बीता पल
जीवन शब्दों का सागर
जीवन भावनाओं से भरा गागर
और यही है सब जमा पूँजी
मेरी कविताएँ , जो कुछ भी ना माँगे
बस इक अदद कोरा काग़ज़
जो मेरी सारी बातों को लिख जाये
@ Ajha . 21. 03. 16
Aparna Jha
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